रिश्ता कोई भी हो पर मज़बूरी मत रख,
मुहोब्बत बेहिसाब कर ,जी हजूरी मत रख।।
गर इश्क़ है तो बेधड़क इजहार कर,
अब दिलों के बीच ये दूरी मत रख ।।
छुपा के रख ज़माने से ,इश्क़ कोहिनूर है,
थोड़ा पर्दा भी रहने दे ,मशहूरी मत रख।।
क्या हुआ गर कुछ खताएँ कर बैठे हो,
भुला दे शिकवे सभी , ये मगरूरी मत रख।।
थोड़ा सोच समझ कर रख कदम इश्क़ में,
बिना सोचे हर बात की मंजूरी मत रख।।
हर दर्द का मरहम मिल जाएगा वक़्त के साथ,
दिल पर कोई भी अब ज़ख्म नासूरी मत रख।।
सज़दे भी कर लाख इबादत भी कर "चौहान",
बेमतलब कोई भी रिवाज़ अब दस्तूरी मत रख।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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