दूर कहीं कायनात में एक घर बनाऊँगा,
तुझे लेके दूर इस जहाँ से उसे प्यार से सजाऊँगा,
हर तरफ बस प्यार ही प्यार होगा वहाँ,
कुछ ऐसा क़ुदरत का अलग रंग बरसाऊँगा,
दूर कहीं कायनात में एक घर बनाऊँगा।।
एक अलग सी महक होगी फिर फ़िज़ाओं में,
एक अलग सा नूर होगा इन घटाओं में,
बस मैं तू और मेरा रब , हम तीनों होंगे वहाँ,
दिल की हर दीवार तेरे नाम से सजाऊँगा,
दूर कहीं कायनात में एक घर बनाऊँगा।।
तू घूमना मेरे संग खुशियों के मेलो में,
रहना दूर पर मेरे संग ज़िन्दगी के रेलो में,
मेरे गीतों में फिर एक नया सुरूर होगा,
फिर मेरी कलम से तेरी दास्तां लिखता जाऊँगा,
दूर कहीं कायनात में एक घर बनाऊँगा।।
फिर ना ये उदास सवेरे होंगें,
खुशियों के बादल तुझे हर तरफ से घेरे होंगे,
महक उठेगी फिर मिट्टी मुहोब्बत की बरसात में,
फिर तेरे ख़्वाबों को मैं हक़ीक़त का रंग दिखलाऊँगा,
दूर कहीं कायनात में एक घर बनाऊँगा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
No comments:
Post a Comment