Thursday, 18 April 2019

"दिल का हाल" (DIL KA HAAL)



ना खुदा कुछ सुनता है , ना वो कुछ सुनना चाहते है,
आ जाओ एक दफा हम तुम्हें अपने दिल का हाल सुनाना चाहते है।।

ये लबों की ख़ामोशी, आँखों की नमी का दर्द है जो,
आ जाओ वो सब सुनाना चाहते है।।
आ जाओ एक दफा हम तुम्हें अपने दिल का हाल सुनाना चाहते है।।


मिलता था सुकून जो तेरी बाहों की आगोश में,
आज इन तन्हाइयों का आलम बताना चाहते है,
क्यों जागते है रहते है हम रात-रात भर,
वो अकेलेपन, वो तन्हाइयों का एहसास कराना चाहते है,
आ जाओ एक दफा हम तुम्हें अपने दिल का हाल सुनाना चाहते है।।

क्यों मेरा दिल इतना बेकरार है,
क्यों इन आँखो को अब तलक तेरा इंतज़ार है,
क्यों तेरी हँसी भूल ना पाते है हम,
क्यों तेरी यादों में हम अकेले मरते जाते है,
आ जाओ एक पल को ही सही, तुम्हे अपने दिल का हाल बताना चाहते है।।

मेरी साँसें थमने लगी है, ये नब्ज़ भी अब जमने लगी है,
ऐसा ना हो के बंद किताबों की कहानियां बनके रह जाये हम,
आ जाओ एक बार आके फिर चले जाना,अब अकेले जीना नही चाहते है,
आ जाओ एक दफा हम तुम्हें अपने दिल का हाल सुनाना चाहते है।।


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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