तू मेरे लिए क्या है क्या था,
जरूरत किसी को बताने की नही है,
एहसास क्या है दिल मे तेरी ख़ातिर,
जरूरत औरों को जताने की नही है,
राख मिट्टी में भी मिलती है तो,
लगती तिलक बनकर माथे पर भी है,
अहमियत दीये को अँधेरे में,
खुद का वजूद बताने की नही है,
बात तो वक़्त पर काम आने की है,
सुई की जगह जरूरत तलवार चलाने की नही है,
पहलू दो होते है हर बात के,सिक्के की तरह,
बात हरबार नज़रिया खुद का अपनाने की नही है,
सच खामोशी में भी सच है,
ज़रूरत चिल्लाकर साबित करवाने की नही है,
वो हर कोई अहमियत रखता है मेरी ज़िंदगी मे,
जो कभी मेरे हाल से होकर गुज़रा है,
ज़रूरत चहरे की उदासी,
हर किसी को दिखाने की नही है।।
रिश्ते वो निभा "चौहान" जो दिल से हो,
जरूरत मजबूरियों से निभाने की नही है,
अपने जज़्बात समेट के रख ले दिल मे कहीं,
जरूरत यूँ खुद को नीलाम करवाने की नही है।।
अदबो-तहज़ीब से पेश आ हर किसी से मगर,
ज़रूरत किसी के आगे सिर झुकाने की नही है।।
यकीन रख अपनी किस्मतों पर भी लेकिन,
जरूरत हर कहीं सज़दे कर गिड़गिड़ाने की नही है।।
जिसका जितना साथ था वो साथ रहा तेरे,
जरूरत बार बार यूँ हर रिश्ता बचाने कि नही है,
ज़ुबाँ कड़वी होती है सच की खामोश रह ,
ज़रूरत "चौहान" हर बात बोलकर बताने की नही है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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