Friday, 26 April 2019

"लौटे नही" (LAUTE NHI)


रास्तों पर करते रहे इंतज़ार हम ,
सदियां गुज़री पर वो लौटे नहीं।।

टूट के बिखर गया खुद में ही मैं,
बाँध उम्मीद के मेरे अभी टूटे नही।।

माना कि उन्होंने कभी समझा नही,
पर वो वादे मेरे प्यार के झूठे नही।।

बिगड़े तो वो हर आदत पर मेरी,
उन्हें खोने के डर से हम रुठे नही।।

लुटा दिया हमने अपना सब कुछ,
वो कहते है इश्क़ में हम डूबे नही।।

कब्र तक ले आया मुझे इश्क़ मेरा,
"चौहान" मरकर भी रिश्ते छुटे नही।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।





5 comments:

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...