सुना है इस दुनिया मे एक अनोखा बाज़ार लगता है,
जहाँ प्यार का व्यापार होता है,
मैं भी एक छोटा सा व्यापारी बनकर आया हूँ,
दिल का दर्द कागज़ पर लिखकर मैं भी यहाँ बेचने आया हूँ।।
खरीदने को ना कोई यहाँ तैयार है,
और दर्द देने वालों की तो यहाँ भरमार है,
लिख के जज़्बात, कुछ फ़साने मुहोब्बत के मैं भी लाया हूँ,
दिल का दर्द कागज़ पर लिखकर मैं भी यहाँ बेचने आया हूँ।।
लिखा है कुछ रात के एहसास को,
पल-पल थमती हुई साँस को,
अपने ज़ख्मों को उनकी बेवफ़ाई से मैं भी सींचने आया हूँ,
दिल का दर्द कागज़ पर लिखकर मैं भी यहाँ बेचने आया हूँ।।
मैं ना कोई शायर हूँ ना कोई ग़ज़लगोर हूँ,
बस वक़्त और किस्मत के हाथों मज़बूर हूँ,
"मेरी कलम" को बना कर"दिल की ज़ुबाँ",
"चौहान", अपने दर्द का मरहम ढूंढने आया हूँ,
दिल का दर्द कागज़ पर लिखकर मैं भी यहाँ बेचने आया हूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
Nice lines👌👌
ReplyDeleteThanks bro 🥰🥰
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