कहाँ मुहोब्बत रह गयी है आज के इस दौर में,
मतलब के रिश्तों के पीछे रिश्ते खून के टूट गए।।
अब तो बातें चाँद तारों वाली सच्ची लगती है,
ताज़ बाप के सिर के इश्क़ में पैरों में छूट गए।।
वो माँ जिसने तालीम दी संस्कारों की अपने,
उसके दिए संस्कार झूठी कसमो वादों में टूट गए।।
ख्वाइशें जिस्म की थी उसे जिसे वो भगवान समझती थी,
माँ-बाप भगवान है ये बाते तो हम कब के भूल गए।।
बड़े ख्वाब देखे होंगे एक तुझे लेकर इस दुनिया में,
विश्वास था खुद से ज़्यादा वो ही ईमान अपनो का लूट गए।।
खुद से ज़्यादा भरोसा करते थे माँ-बाप जिसपर,
दर्पण भ्रम के तो ना जाने कबके हाथों से छुट गए।।
वो जिस खातिर "चौहान" इज़्ज़त घर की भुलाये बैठी है,
वो सच्ची मुहोब्बत रिश्ते जिस्मों पर आकर टूट गए।।
ज़्यादा समझ तो नही है अभी "चौहान" इस बाजार की,
दो दिन के इश्क़ के खेल में घर अच्छे अच्छे टूट गए।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

bht hi khoobsurat shubham
ReplyDeleteThanks naveen bhai 😍😍😍😍😍
DeleteGreat work.... Keep it up 👍👍😍😍😘
ReplyDeleteThanks alot dear 😍😍😍😍😍
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