क्या ख़बर कब किसकी नज़र लग जाए,
मुझसे मेरे ये ख़्वाब ना पूछा करो तुम।।
मैं जिसपर हूँ उस राह की मंज़िल नही कोई,
मुझ काफिर की जात ना पूछा करो तुम।।
किसी की मुहोब्बत ने ज़िंदा रखा है मुझे,
मुझ फ़क़ीर के हालात ना पूछा करो तुम।।
ना जाने कब ये आँखे बेक़ाबू हो जाये,
मुझसे मेरे जज़्बात ना पूछा करो तुम।।
बड़ा सुकून मिलता था आगोश में उसकी,
मुझसे वो इश्क़-ए-रात ना पूछा करो तुम।।
मेरी कलम देती है आजकल परिचय मेरा,
मुझसे मेरी औक़ात ना पूछा करो तुम।।
लिखने पर आया तो जला के ख़ाक कर दूँगा,
"चौहान" कलम की बिसात ना पूछा करो तुम।।
कलाकार हूँ अपनी कला में ही जीता हूँ,
मुझसे यूँ मेरा ईमान ना पूछा करो तुम।।
मैं राम को भी मानता हूँ राहीम को भी,
मुझसे मेरा भगवान ना पूछा करो तुम।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

ना जाने कब ये आँखे बेक़ाबू हो जाये,
ReplyDeleteमुझसे मेरे जज़्बात ना पूछा करो तुम।।
Best time bhai keep it up ������
Thanks bro ♥️♥️♥️
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