खुद गीले में सो, मुझे सूखे में सुलाती थी,
जिसके आँचल की छांव में नींद सुकूँ की आती थी,
माँ तब भी वही थी, माँ आज भी वही है।।
खुद ना खाकर जो पहले मुझे खिलाती थी,
मेरी छोटी सी चोट पे आँखें जिसकी नम हो जाती थी,
माँ तब भी वही थी, माँ आज भी वही है।।
बाहर कहीं जाने पर मेरे घर आने की फिक्र सताती थी,
मुसीबतों में मुझको जो सबसे पहले याद आती थी,
माँ तब भी वही थी, माँ आज भी वही है।।
जिसको मैंने हर वक़्त अपने संग संग पाया ,
जिसकी बातों ने मुझे बेहतर इंसान बनाया,
माँ तब भी वही थी, माँ आज भी वही है।।
जिसके पैरों में अक्सर मुझको ज़न्नत मिल जाती है,
जिसकी सूरत में "चौहान" रब की सूरत नज़र आती है,
माँ तब भी वही थी, माँ आज भी वही है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

🙏🙏🙏meri dua hai uparwale se duniya k hr maa achi health or khushi k saath apne family k saath jindagi guzare....
ReplyDeleteThanks 😍😍😍😍😍
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