इश्क़ हसीन मुलाकातों का सफर,
उधर तू बेसबर, इधर मैं बेसबर।।
काटों से भरी मुश्किल ये डगर,
उधर तू बेखबर, इधर मैं बेखबर।।
दो पल के हमराही है हम,
फिर ना जाने तू किधर, मैं किधर।।
कहाँ कहाँ से होकर गुज़री है,
तेरी मेरी ज़िंदगी की रहगुज़र।।
कुछ ख़्वाब आरज़ू दफ़न हो गयी,
श्मशान बन गया दिल का शहर।।
अब तक कलम हाथ मे है "चौहान",
कुछ ऐसा था मुहोब्बत का असर।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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