Wednesday, 13 May 2020

"हाल-ए-दिल" (HAAL-E-DIL)


अब हँसी ख़ुशी तस्वीरों में ठहर गयी ,
हकीकत में गुमशुदा है ना जाने किधर गयी ।।

बहुत सख्त बना कर रखे थे ये दरवाजे आँखो के,
आसुओं से टूट गए एक रात और बिखर गई ।।

तुझे जुदा हुआ के रूठ गया हूँ खुद से ही,
जिस्म ही बाकी है रूह तो कभी बिछड़ गयी ।।

अभी आया भी कहाँ था तूफ़ान तेरी यादों का,
मेरी दिल की बस्ती देख आज फिर उजड़ गयी ।।

सोचा था के एक रोज़ भुला ही दूँगा तुझे मैं,
इस सोच में भी कही तेरी याद उमड़ गयी ।।

क्या बताऊँ हाल क्या है"चौहान" इस मोड़ पर आकर,
एक कब्र के सामने आके ज़िंदगी ख़ामोश निकल पड़ी।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

4 comments:

  1. No word brother ♥️♥️♥️
    तुझे जुदा हुआ के रूठ गया हूँ खुद से ही,
    जिस्म ही बाकी है रूह तो कभी बिछड़ गयी

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