ये कैसा मंज़र है, जिसके गुनहगार हम नही है,
क्या इन सब हालातों के क़सूरवार ,हम नही है??
जिसे मन आया मार दिया, मन आया कैद किया,
क्या इस हैवानियत के शिल्पकार, हम नही है??
वक़्त के खेल है ,कब ,कहाँ ,करवट लेले किसे ख़बर,
आज पँछी आज़ाद ,पिंजरे में गिरफ्तार, हम नही है??
वो तो आज भी वैसे ही जी रहे है ,जैसे कल जीते थे,
इन पाबंदियों के असलियत में हक़दार ,हम नही है??
वो भूख के लिए मारते थे, हम इंसानी हुकूमतों के लिए,
इंसानियत कहाँ, इन जानवरों से बेकार ,हम नही है ??
हर किसी को ग़ुलाम बना, जीव पर हुकूमत करने वालो ,
आज पूछता है "चौहान" गुलामी के हक़दार,हम नही है??
हर किसी को तो नुकसान पहुँचाते आये है, अपने फायदे के लिए,
क्या आज इन हालातों के हकीकत में रचनाकार , हम नही है??
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice
ReplyDeleteThanks 🤗🤗
DeleteNice...��������
ReplyDeleteThanks 🤗🤗
DeleteTit for tat baby....
ReplyDeleteYes ...papi insaan 🤣🤣🤣
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