हाँ मुझे प्यार करना नही आता ,
तेरी बातों से इंकार करना नही आता।।
माना आज अकेला हूँ इस दुनिया के बाज़ार में,
क्या करूँ रिश्तों में व्यापार करना नही आता।।
चाँद सितारे कदमो में लाने की बातें तो मैं भी कर लेता,
पर अपनी कही बातों से इंकार करना नहीं आता।।
आज अकेला हूँ सच्ची मुहोब्बत लेकर इस बाजार में,
क्या करूँ मुहोब्बत में जिस्मो वाला प्यार नही आता।।
मन तो मैं भी बहला देता तेरा चंद मीठी बातों से ,
क्या करूँ मुझे खुद ये दिखावे का संसार नही भाता।।
लिख तो "चौहान" भी देता तेरे इश्क़ में कोई ग़ज़ल,
क्या करूँ अहसासों को लफ़्ज़ों में पिरोना नही आता।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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