Thursday, 27 December 2018

"वक़्त और याद"(WAQT AUR YAAD)


माना अच्छे में ना सही , वक़्त बुरे में सही,
याद तो आज भी करती होगी वो मुझको।।

माना महफ़िल में ना सही,तन्हाइयों में ही सही,
ज़हन में आज भी रखती होगी वो मुझको।।

माना हक़ीक़त में ना सही, ख़्वाबों में ही सही,
कभी ना कभी देखती तो होगी वो मुझको।।

माना पाने को ना सही, भुलाने को ही सही,
सजदों  में याद तो करती होगी वो मुझको।।

माना जिस्म से नहीं, पर रूह से ही सही,
हरपल महसूस तो करती होगी वो मुझको।।

माना बहाने से ही सही , क़ब्र पर मेरी,
मिलने तो आती होगी "चौहान" वो मुझको ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।




2 comments:

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...