Thursday, 20 December 2018

"कमी" (KAMI)


कोई वजह तो बता,
तेरी सज़ा क़बूल,
मेरा गुनाह तो बता,
मैंने तो अपना सब गवा लिया,
वो तो बता जो तूने मुझे खो के पा लिया,
कब तेरा मन मुझसे उब गया,
कब दरार आयी इस रिश्ते में,
कब ये कांच सा टूट गया,
प्यार तो मैंने भी किया था तुझसे,
माना प्यार तो उसने भी किया,
क्या कमी रह गयी फिर,
प्यार में मेरे वो कमी तो बता,
ये चाँद सितारे ज़मी आसमा ,
क्या कदमो में ला दिया उसने,
ज़रा मुझे भी तो बता,
वो शाम तो बता जो मेरी,
डुब के अब रात हो गयी ,
वो वादें तो याद कर ,
जो आज गुज़री बात हो गयी,
क्या मेरी तरहा कभी उसने भी,
हाथों से तेरे बालों को सहलाया,
क्या कभी उसने भी आँसू पोंछ तेरे,
तुझे सीने से लगाया,
क्या बिन बोले जान जाता है ,
वो भी तेरे दिल के जज़्बात,
क्या गुज़ार देता है पहरों,
तेरे इंतज़ार में तेरी यादों के साथ,
क्या वो भी तेरे हर गम को अपना समझता है,
क्या वो भी तेरे सपनो को हकीकत समझता है,
क्या वो भी खुश है तेरी बातों के ढंग से,
समझा लेता है क्या दिल को तेरे बदलते रंग से,
मुहोब्बत के किस ढंग से वो तेरा दिल बहलाता है,
साँसों से साँसें मिल जाती थी हमारी,
क्या वो भी इतना करीब आ जाता है,
जो तुझे रात भर पढ़ के सुनाता है,
वो गज़ल वो शायरी वो नज़्म तो सुना,
कमी क्या रह गयी थी मुहोब्बत में मेरी,
मुझे वो कमी तो बता।।
मुझसे दूरियां करीब उसके ला गयी,
या उसकी नज़दीकियां तुझे भा गयी,
दोष हालातों का था या मजबूरियां थी,
सच नही तो "चौहान" को झूठा बहना ही बता,
कमी क्या रह गयी थी मुहोब्बत में मेरी,
मुझे वो कमी तो बता।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।



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