Monday, 14 May 2018

"मेरी पहचान - मेरे पापा" (MERI PEHCHAAN - MERE PAPA)


माना दिखाते नही है वो प्यार जताते नही है ,
जज़्बातों को आंखों से कभी बहाते नही है ।।

मुझे हर खुशी देने की ख़्वाईश लिए जीते है ,
अपनी परेशानियों को चहरे से झलकाते नही है ।।

भूल जाते है अपना हर सुख मेरे सुख के आगे ,
कैसे रखतेे है ना जाने इतनी बात दिल मे छुपा के ।।

करते है गुस्सा मुझपर वो ना जाने कितनी दफा,
पर कोई और मुझे बोले ये ज़रा भी सह पाते नही है ।।

मेरे ख़्वाबों को हकीकत बनाने की कोशिश करते है,
खुद के कितने ख़्वाब दफ़न है कभी जताते नही है ।।

अपने सपनों को मार कर मेरे सपनों में जीते है ,
मेरे कल की सोच कर वो आज में भी जी पाते नही है।।

हर मुश्किल में मेरे साथ आ खड़े हो जाते है ,
अपने माथे की सिकन कभी किसी को दिखाते नही है।।

होंगे इंसान दुनिया की नज़र में वो पर सच है,
"चौहान" को तो भगवान से कम नज़र आते नहीं हैं।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No comments:

Post a Comment

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...