Saturday, 12 May 2018

"माँ" (MAA)


वो रातों की मीठी मीठी लौरी,
फिर से माँ गा के सुना दे।।
थक गया हूँ ज़िन्दगी की राह में ,
फिर से तेरे आँचल में सुला ले।।
फेर दे माँ हाथ तेरा माथे पर मेरे ,
माथे की सिकन को आके तू मिटा दे ।।
थक गया हूँ जाग-जाग के मैं,
थक गया हूँ भाग - भाग के मैं,
आके अपने बेटे को माँ सीने से लगा ले ।।
भूख भी तो माँ अब लगती नही है ,
आज तेरे हाथोँ मुझे खाना खिला दे ।।
शरारतों को मेरी नज़रन्दाज़ मत कर ,
आज फिर से वो मीठी -सी डाँट लगदे।।
हर वक़्त तो संभाला है तूने "चौहान" को,
ज़िन्दगी जीने का माँ एक सलीका और सीखा दे।।
वो रातों की मीठी मीठी लौरी,
फिर से माँ गा के सुना दे।।
थक गया हूँ ज़िन्दगी  की राह में,
फिर से तेरे आँचल में सुला ले ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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