Sunday, 13 May 2018

"मेरा सच - मेरी कहानी" (MERA SACH - MERI KAHANI)


अमीर भी हूँ और फ़क़ीर भी ,
ज़िंदा भी हूँ और तस्वीर भी ।।

चुप रहता हूँ पर अल्फ़ाज़ों से बोलता हूँ,
खुद से ही अपनी औकात टटोलता हूँ।।

हसरतें इतनी है के आसमान भी छोटा पड़ जाए,
ज़रूरत से नहीं ख़्वाईश से अपने पंख खोलता हूँ।।

अच्छा नही लगता लोगों को मेरा अंदाज़-ए-गुफ्तगू,
जो बोलता हूँ सबके मुँह पर बोलता हूं ।।

कई राज दफ़न है मुझमे मेरे  ,
कई राज है जो कलम से खोलता हूँ।।

हार-जीत का फर्क नही पड़ता अब मुझे,
वक़्त की ठोकरें खा हालातों से सीखाता हूँ ।।

नफ़े नुकसान की परवाह कभी करता नही ,
मेरी माँ के सिखाये उसूलो पर जीता हूँ।।

कभी वक़्त मिलेगा तो  बताऊंगा तुम्हे भी मैं,
"चौहान" ज़िद्द है वो मेरी मरकर भी उसमें जीता हूँ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


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