अगर मैं ना रहा ,तुझमे क्या बाकी तेरा होगा ।
सोच के तो देख मुझबिन कैसा तेरा सवेरा होगा ।।
कैसे छुपाओगी उदासी अपने इस चेहरे से ।
जब तेरे दिल-ओ-दिमाग पर मेरी यादों का पहरा होगा ।।
सोच कैसे गुज़रेगी रातें तेरी मेरे बिन ।
जब तुझे बस तन्हाइयो ने घेरा होगा ।।
कैसे मिलोगी आँखें तुम किसी से मेरे बाद ।
जब हर कहीं देता दिखाई मेरा ही चेहरा होगा ।।
कैसे मानोगी की ज़िन्दगी है अब मेरे बिन ।
जब तेरे दिल की दीवारों पर अक्ष मेरा होगा ।।
कहाँ फिर किसी दर से मांग पाओगी मुझे तुम ,
"चौहान" का जब दूर तारों में बसेरा होगा ।।
कहाँ लिख पायेगा फिर कोई " मेरी कलम-दिल की ज़ुबाँ"।
जब तेरी दुनिया में कोई वजूद ही ना मेरा होगा ।।
"शुभम् सिंह चौहान"
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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