Wednesday, 28 February 2018

"मैं ना रहा" (MAIN NA RHA)


अगर मैं ना रहा ,तुझमे क्या बाकी तेरा होगा ।
सोच के तो देख मुझबिन कैसा तेरा सवेरा होगा ।।

कैसे छुपाओगी उदासी अपने इस चेहरे से ।
जब तेरे दिल-ओ-दिमाग पर मेरी यादों का पहरा होगा ।।

सोच कैसे गुज़रेगी रातें तेरी मेरे बिन ।
जब तुझे बस तन्हाइयो  ने घेरा होगा ।।

कैसे मिलोगी आँखें तुम किसी से मेरे बाद ।
जब हर कहीं देता दिखाई मेरा ही चेहरा होगा ।।

कैसे मानोगी की ज़िन्दगी है अब मेरे बिन ।
जब तेरे दिल की दीवारों पर अक्ष मेरा होगा ।।

कहाँ फिर किसी दर से मांग पाओगी मुझे तुम ,
"चौहान" का जब दूर तारों में बसेरा होगा ।।

कहाँ लिख पायेगा फिर कोई " मेरी कलम-दिल की ज़ुबाँ"।
जब तेरी दुनिया में कोई वजूद ही ना मेरा होगा ।।

"शुभम् सिंह चौहान"
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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