Sunday, 4 February 2018

"एहसास" (EHSAAS)


इन हवाओं में तेरी नमी का एहसास है,
इन बारिशों में तेरी कमी का एहसास है !!

इन घटाओं को तेरी घनी ज़ुल्फों की तलाश है ,
इन बादलों में तेरे सुर्ख लबों की प्यास है !!

इस समुंदर को तेरी आँखों में सिमटने की आस है  ,
इन फ़िज़ाओं में घुलती जैसे तेरी हर सांस है  !!

मेरे अलफ़ाज़ तेरे लबों को चूमने को बेताब है ,
तेरे चहरे के नूर के आगे फीका आफताब है !!

मेरी कविताओ में तेरे प्यार का एहसास है  ,
तू चाहे कहीं भी रहे "चौहान " के जीने की आस है !!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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