इन हवाओं में तेरी नमी का एहसास है,
इन बारिशों में तेरी कमी का एहसास है !!
इन घटाओं को तेरी घनी ज़ुल्फों की तलाश है ,
इन बादलों में तेरे सुर्ख लबों की प्यास है !!
इस समुंदर को तेरी आँखों में सिमटने की आस है ,
इन फ़िज़ाओं में घुलती जैसे तेरी हर सांस है !!
मेरे अलफ़ाज़ तेरे लबों को चूमने को बेताब है ,
तेरे चहरे के नूर के आगे फीका आफताब है !!
मेरी कविताओ में तेरे प्यार का एहसास है ,
तू चाहे कहीं भी रहे "चौहान " के जीने की आस है !!
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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