Wednesday, 28 February 2018

"मुसाफ़िर" (MUSAFIR)


इस दुनिया में सब मुझें मुसाफिर नज़र आते है ।
जहाँ तक देखूं मुहोब्बत में सब काफिर नज़र आते है ।।

कोई मंदिर में तो कोई मस्ज़िद में कर रहा है सज़दे ।
हर तरफ लोग किसी की चाहत के मुतासिर नज़र आते है ।।

कोई किसी को मिल गया तो कोई किसी से हो गया जुदा।
कहीं हसीं तो कहीं प्यार में खौफ़नाक मंजर नज़र आते है ।।

कहीं आँखों में गम के तो कहीं आँसू है ख़ुशी के ।
हर तरफ यहाँ अश्क़ों के समुन्दर नज़र आते है ।।

"चौहान" क्या मिलेगा तुझे लिख-लिख के यूँ हाल-ए-दिल।
मुहोब्बत में अक्सर लोगों को खुद में सिकंदर नज़र आते है ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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