Thursday, 22 February 2018

"अच्छा लगता है" (ACCHA LAGTA HAI )


अच्छा लगता है तेरा बिन बताये यूँ फिकर करना ।
अच्छा लगता है तेरा मेरे संग यूँ बेफिक्र चलना ।।

अच्छा लगता है तेरा मेरे ख़्वाबों में आना ।
अच्छा लगता है तेरा मुझमे कहीं खो जाना।।

अच्छा लगता है हरपल तुझे खुद के साथ पाना ।
अच्छा लगता है तेरी बातों में मेरा ही ज़िक्र आना ।।

अच्छा लगता है सबसे छुप के मुझसे मिल जाना ।
अच्छा लगता है तेरा सब आँखों में ही समझ जाना।।

अच्छा लगता है तेरा रूठ के मुझको मनना।
अच्छा लगता है तेरा दिल को तड़पना ।।

अच्छा लगता है अश्क़ों को तेरी यादों में बहाना।
अच्छा लगता है तेरे ग़मों को सीने से लगाना।।

एक कलम बस लिखती है तेरे इश्क़ के फ़साने ।
अच्छा लगता है "चौहान" के जिस्म में तेरा रूह सा पाना ।।


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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