Sunday, 31 December 2017

"मुझे कुछ आता नहीं है " (MUJHE KUCH AATA NHI HAI)



मैं हूँ सिफ़र मुझे कुछ आता नहीं है ,
पर हूँ बेफ़िक्र के मुझे कुछ आता नहीं !!

झूठ घमंड कोसों दूर हो जाते है मुझसे  ,
जब बैठ के सोचता हूँ के मुझे कुछ आता नहीं !!

आता नहीं है मुझे रिश्तों में फरेब करना ,
खुश हूँ अकेला ये ज़माना मुझे भाता नहीं है !!

मतलब की दुनिया है लोगो कों सच से परहेज़ है ,
जो दूर है वो दूर रहे ,झूठे लोगों से रिश्ते "चौहान" बनता नहीं है !!

किसको क्या पता क्या खेल है खुदा का ,
जिसको बनाना खुदा चाहता है उसको मिटा कोई पता नहीं है !!

थोड़ी अदब-तहज़ीब सीख ले "चौहान " अब तो ,
भ्रम बनाये रख के सच है  तुझे कुछ आता नहीं है !!

शुभम सिंह चौहान 
मेरी कलम -  दिल की जुबां 

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