Monday, 6 April 2020

"वक़्त" (WAQT)


एक जैसा रहा ही कब है ये वक्त,
आज दुख है,तो कल सुख भी आएगा।।

माना आज मुश्किलें हज़ार है तो क्या,
एक वक्त पर,ये वक़्त भी बीत जाएगा।।

मौत तो सिर्फ कोई एक वजह, एक बहाना ढूंढती है,
कहाँ लिखा है जो आया है,वो लौटकर ना जाएगा।।

ये कर्म हमारे ही है, जो गिरफ्त में है आज खुद के ही,
हमेशा से तो कहते आये है, जो होगा देखा जाएगा।।

सब बराबर है उसकी चौंखट पर, ये समझा रहा है वो,
तू चाँद तक चला गया तो क्या, भगवान बन जाएगा।।

ये जो मज़हब के नाम पर, लोगो को राह से भटकाते है,
दो ग़ज़ ज़मी के सिवा, हिस्से में कुछ भी ना आएगा।।

ये वक़्त की मार है ,ये कौम, मज़हब, धर्म,जात, कुछ नही देखती,
मत सोचना के इस आग की जहद में, घर तुम्हारा ना आएगा।।

माना पाबंदियां है, घर मे रहने की और कोई काम नही है,
तुझे भाया ना आशियाँ तेरा, तो फिर तुझे क्या भाएगा।।

ये वो वक़्त है,जो अपनो को देने के लिए तरसता था तू,
हँसी खुशी जी ले, कल कहाँ तू किसी को ये वक़्त दे पाएगा।।

गम में भी खुशी ढूंढ लेना, ये तो आदत है मेरी "चौहान",
आज ये पल जी ले अपनो के साथ ,कल जो होगा देखा जायेगा।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

4 comments:

  1. एक जैसा रहा ही कब है ये वक्त,
    आज दुख है,तो कल सुख भी आएगा।। Aye hye true 😍😍😍

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