Thursday, 30 April 2020

"अपने या बेगाने" (APNE YA BEGANE)


ये जो तुझे कहते है "मैं तुझे मेरे अपनो से ज़्यादा अपना मानता हूँ",
इनकी बातों में मत आ मैं ऐसे लोगो को बख़ूबी पहचानता हूँ।।

हाँ तेरे बूरे वक़्त में ये तेरे पास तेरा हमदर्द बनकर आ जाते है,
कभी देखना रिश्तों को किनारे करके ऐसे हालात तेरे ये खुद बनाते है।।

तेरे पास रहकर ये चाहे तेरी ही ज़ुबाँ में बातें किया करते है,
इतने शरीफ़ भी नही जैसा ये शराफ़त का चौला पहन कर आते है।।

गलत कहते है कि बातें बता दिया करो दिल का बोझ हल्का हो जाएगा,
ये बात बात पर ज़ख्म कुरेदते है तेरे जो तुझे मरहम नज़र आते है।।

जानता हूँ तुझे बुरा लगता है मेरा यूँ बार बार तुम्हे रोकना टोकना,
क्या सही करते है जो ये तुझे फूल तो दिखाते है काटों का नही बताते है।।

एक रोज़ जब सब भूल कर "चौहान" से अलग हो जाओगे तुम ,
बताना कब्र पर मेरी आकर ,क्या ये हकीकत में तुझे आईना दिखाते है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

4 comments:


  1. ये जो तुझे कहते है "मैं तुझे मेरे अपनो से ज़्यादा अपना मानता हूँ",
    इनकी बातों में मत आ मैं ऐसे लोगो को बख़ूबी पहचानता हूँ true ... Top class work Bhai ♥️🌹😋

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    1. Thanks bro ...tu bolta hai na ye line 🤣🤣🤣🤣

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  2. जानता हूँ तुझे बुरा लगता है मेरा यूँ बार बार तुम्हे रोकना टोकना,
    क्या सही करते है जो ये तुझे फूल तो दिखाते है काटों का नही बताते है।।...maassaahh allah kya khub khaa hai,,,

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