चल आज तुझसे भी बात कर लेता हूँ,
जैसी कभी हुई नही वैसी मुलाक़ात कर लेता हूँ मैं,
हर रोज़ एक झुठ तुझसे कह देता हूँ मैं,
तुझे सुला कर रात भर रो लेता हूँ मैं,
ऐसा नही के मैं तुझे अपना नही मानता,
तुझे यूँ हँसता हुआ देखना चाहता हूँ मैं,
बस इसलिए अपने ग़मो को खुद में समेट लेता हूँ मैं,
तुझपर गुस्सा भी अब दिखाने लगा हूँ मैं,
हाँ, अब ज़िंदगी पर तरस खाने लगा हूँ मैं,
मुहोब्बत ही कहाँ तेरी इबादत करता हूँ मैं,
एक का साथ हरा करता है,
एक से दूरी मुझे मुरझा रही है,
तेरे लिए जीना भी चाहता हूँ,
एक कि याद में मर रहा हूँ मैं,
हाँ, कभी कभी बात नही कर रहा तुझसे,
जैसे कई दिनों से इबादत नही कर रहा हूँ मैं,
तुझसे नाराज़गी नही है कोई मेरी,
इस तन्हाई में खुद से ही लड़ रहा हूँ मैं,
एक ज्वालामुखी सा दहक रहा है मुझमें,
ना जाने क्यूँ इस आग में झुलस रहा हूँ मैं,
एक तेरा भी गुनहगार ही हूँ मैं यहाँ,
जो तुझसे ऐसे बर्ताव कर रहा हूँ मैं,
नही निकला जा रहा इन रास्तों पर भी,
हर अनजान चहरे से अब डर रहा हूँ मैं...।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

True real story Bhai .... No words brother keep it up♥️♥️♥️♥️😘😘😘♥️♥️♥️😘😘♥️♥️😘♥️♥️♥️♥️
ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍😘😘😘
DeleteNice lines bro❤️👌👌
ReplyDeleteThanks 😍😍
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