Friday, 7 February 2020

"दुनिया" (DUNIYA)


काश अपनी एक अलग दुनिया बना पाता,
इश्क़ करने वालों को मिला पाता।।

वो जो मुहोब्बत में खुद को लुटा के बैठे है,
उनको इस राह में मंज़िल तक ला पाता।।

मैं खुदा तो नही के तक़दीर लिखुँ ,
बस ज़िंदगी को ज़िंदगी बना पाता।।

जो किस्से अधूरे रह गए इश्क़ में,
उनको फिर मैं मुक्कमल कर पाता।।

जहाँ इश्क़ पीर-ओ-मुर्शद होता,
जहाँ मुहोब्बत को जात बनाता।।

आज बंद किताबों में मर रही है मुहोब्बत,
काश मुहोब्बत को हकीकत बना पाता।।

ये जो शरेआम बदनाम हो रही है,
मुहोब्बत को इबादत का दर्ज़ा दिलाता।।

फिर शौक से लिखता कहानी अपनी "चौहान",
जिसे खुदा बनाया उसका नाम भी बताता।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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