अनजाने से ही सही, मुलाक़ात तो हुई,
खामोशी से ही सही, खैर बात तो हुई।।
एक अरसे से बैठे थे चौंखट पर उनकी,
देर से ही सही हमपर ख़ैरात तो हुई।।
दिल की ज़मी सुख कर बंजर हो गयी थी,
मुद्दतों बाद ही सही सहारा में बरसात तो हुई।।
दिए जलते थे बुझ जाते थे नींद की तलाश में,
उम्रभर के लिए सही पर शुक्र है रात तो हुई।।
मेरी हर एक कहानी में ज़िक्र उसका आया है,
नफरतों में सही उनके लबो से मेरी बात तो हुई।।
कब्र पर आई और मुझसे लिपट कर रोई भी,
"चौहान" मरकर ही सही मुलाकात तो हुई।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Wah...👌👌👌👌😘
ReplyDeleteThanks 😍😍
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