Thursday, 13 February 2020

"मैं और चाँद" ( MAIN AUR CHAND)


सितारों की महफ़िल थी, खुशियों का मेला था,
ज़मी पर मै औऱ आसमाँ में चाँद अकेला था।।

वो भी थोड़ा गुमसुम सा था ,मैं भी थोड़ा उदास था,
उसके भी जज़्बातों से किसी ने जमकर खेला था ।।

निगाहों में मायूसी थी उसके मेरे लबों पर ख़ामोशी थी,
कहानी जानी पहचानी थी इश्क़ का झमेला था।।

उसके दिल मे चुभन थी, मेरे दिल मे तड़पन थी,
उसे अमावस ने तो मुझे किसी की यादों ने घेरा था।।

तलाश में वो भी था किसी की तलाश में मैं भी था,
मंज़िले नही थी दोनों की इन रास्तों पर बसेरा था।।

मैं किसी की फिक्र में था वो किसी के जिक्र में था,
इश्क़-ए-राह में कब्रिस्तान टूटे ख्वाबों का मिला था।।

एक दाग लिए फिरता था वो मैं सौ दाग लिए फिरता था,
उसे शाप मिला था और मेरा मेरी वफ़ाओं का सिला था।।

वो भी किसी का ख्वाब था मैं भी किसी का ख्वाब था,
हश्र पता था "चौहान" मैं अपनी मौत से खुद गले मिला था।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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