Saturday, 8 February 2020

"अधूरी कहानियाँ" (ADHURI KAHANIYAAN)


कहानियाँ अब अधूरी है तो अधूरी रहने दो,
रिश्ते मज़बूरी है तो इनमें दूरी रहने दो।।

क्या फर्क पड़ता है तेरे मन का है या नही,
खुदा के फैसलों पर दिल से मंजूरी रहने दो।।

तेरा था ही कब वो जो इन हालातों में छोड़ गया,
माना इश्क़ है पर इश्क़ में थोड़ी मगरूरी रहने दो।।

क्या फर्क पड़ता है तुम यहाँ अच्छे हो या बुरे,
ये इश्क़ का बाज़ार है इसमें बस मशहूरी रहने दो।।

वो चाँद तब तलक ही अच्छा है जब तलक दूर है,
इस धरती आसमाँ में बस यूँ दूरी ही रहने दो।।

कहाँ दिल का हाल बयाँ होता है लफ्ज़ो में "चौहान",
इन लिखावटों में दिल की जी हज़ूरी रहने दो।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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