ख़ामोश हूँ पर अनजान नही मुझे सबका एहसास है,
कौन कितना साथ है मेरे और कौन कितना पास है।।
जो खुद को सागर बनाये बैठे है मुझ दरिया के आगे,
कौन कितना गहरा है और किसकी कितनी प्यास है।।
पहरान पूराना ही सही पर मेरी हक़ीक़त बयां करता है,
सबकी हक़ीक़त जानता हूं चाहे कैसा भी लिबास है।
चंद मीठी बातें बोलकर यूँ खुद को मेरा हमराज़ ना समझ,
सबका पता है कौन साथ है और कौन मेरे ख़िलाफ़ है।।
एक वक्त पर तो रास्ते भी ठहर जाते है मंज़िलों पर आकर,
बेईमान "चौहान" ना जाने तेरे वजूद को किसकी तलाश है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Wah ....👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThanks 😍😍😍
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ReplyDeleteTuesday, 4 February 2020
"एहसास" (EHSAAS)
ख़ामोश हूँ पर अनजान नही मुझे सबका एहसास है,
कौन कितना साथ है मेरे और कौन कितना पास है।। Fabulous brother 💓
Bhut badhiya
ReplyDeleteThanks 😍😍
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