कोई जुगत कोई जतन है तो मुझे भी बता खुदा,
देख यहाँ बेमौसम मुहोब्बत के फूल मुरझा रहे है।।
ये सलामत नही अंदर से टूट के बिखर चुके है
जो बेइंतहा मुस्कुराते हुए तुम्हे नज़र आ रहे है।।
कभी आकर तू ही कोई दवा दारू कर मौला,
ये वक़्त के मरहम तो ज़ख्मो को नासूर बना रहे है।।
जीते जी तो कोई हो ना सका मेरा मेरे हाल का,
ये कौन लोग है जो मेरी कब्र पर अश्क़ बहा रहे है।।
एक अरसे बात वापिस लौटा कोई अपना ना मिला,
ये कौन लोग है जो मुझे उनका अपना बता रहे है।।
कभी मुलाकात नसीब ना हो पाई उनसे हमारी,
कबके मर जाते पता होता वो मेरी कब्र पर आ रहे है।।
कौन तेरे दिल का हाल लिखेगा "चौहान" इस बस्ती में,
यहाँ सब तेरी दर्द-ए-कहानी का लुफ़्त उठा रहे है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Beautiful lines bro
ReplyDeleteFabulous work bhai
ReplyDeleteThanks bro 😘😘
Deleteजीते जी तो कोई हो ना सका मेरा मेरे हाल का,
ReplyDeleteये कौन लोग है जो मेरी कब्र पर अश्क़ बहा रहे है। Favourite lines
😍😍😍😍😍😍😍
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