तेरी मेरी कहानी,
क्या यूँ ही रह जायेगी,
आधी, अधूरी ,अनकही ,अनसुनी,
क्या यूँ ही रह जायेगी,
तेरी मेरी कहानी।।
वो ख़्वाब जो मिलकर देखे थे,
सच्चे थे सब झूठे तो नही थे,
क्या माला उन ख्वाबों की,
युहीं टूट के बिखर जाएगी
तेरी मेरी कहानी ,
क्या यूँ ही रह जायेगी।।
हम धरती और आसमाँ तो नही,
जिनका कभी होता मिलन ही नही,
क्या रेल की पटरियों की तरह ,
ज़िंदगी युहीं फ़ासलों में बीत जाएगी,
तेरी मेरी कहानी ,
क्या यूँ ही रह जायेगी।।
माना लिख देता हूँ जज़्बात हज़ार,
तकदीर लिखुँ अपनी मैं खुदा तो नही,
क्या हर कहानियों की तरह "चौहान",
ये कहानी भी किताबों में दफन हो जाएगी,
तेरी मेरी कहानी ,
क्या यूँ ही रह जायेगी।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice....
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteAmazing
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteNo words to say it's really heart touching ....��������
ReplyDeleteThanks 😍😍
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