Friday, 29 November 2019

"वक़्त" (WAQT)


वक़्त कब किसका हुआ है ,
आज तेरा तो कल मेरा भी आएगा।।

माना रात काली घनी गहरी है मगर,
इस रात के बाद रौशन सवेरा भी आएगा।।

आज किसी और का नाम है तो क्या,
कल ज़ुबाँ पर लोगों के नाम मेरा भी आएगा।।

इस सफर में छाव देखकर रुकना मत,
मंज़िलों पर फिर नाम मेरा भी आएगा।।

जो छोड़ गए बीच राह उन्हें याद मत कर,
जब होश आएगा तो ख़्याल मेरा भी आएगा।।

जो जैसा लिख रहा है लिखने दे गौर ना कर,
एक दिन लिखा सामने सबके फिर मेरा भी आएगा।।

आज लिख रहा है तू बनके ज़ुबाँ आवाम-ए-दिल की ,
किसी कहानी में तो "चौहान" ज़िक्र मेरा भी आएगा।।

किस बात की हैरत और किस बात की फिक्र "चौहान",
सब उनकी नज़र में है, उसकी तहरीर से सबके लिए लिखा जाएगा।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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