Monday, 11 November 2019

"EK PAL" (एक पल)


दे उम्र भर का अंधेरा बस एक पल को सवेरा कर दे,
दे ज़िंदगी दो लम्हात की उन लम्हो में तुझे मेरा कर दे।।

नही ख्वाइशें मेरी तेरे आसमाँ के रोशन चाँद सितारों की ,
जुगनुओं से ही मेरे दिल-ए-शहर का दूर अँधेरा कर दे।।

नही ख्वाइशें मुझे खुदा तेरे किसी बड़े तख़्तो-ताज की,
कर सकता है तो उसके दिल-ए-मकाँ में मेरा बसेरा कर दे।।

फिर चाहे तन्हाइयों से वास्ते रख मेरे उम्र भर के लिए,
बस एक बार उसकी महफ़िलों में नाम मेरा कर दे।।

सुना है अधूरे नही रहते वो किस्से जिन्हें तू लिखता है,
मेरी भी मुहोब्बत का किस्सा कलम से तेरी पूरा कर दे।।

मैं नही कहता तू वजूद रख "चौहान" का आफताब की तरह,
उसको रौशनाता रहूँ खुद को जला अंधेरे में मुझको दीया ही करदे।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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