कहाँ औक़ात थी कुछ लिखने की,
कुछ अपनो ने ,कुछ गैरों ने,
कुछ जमाने ने अपना रंग दिखा दिया।।
कोई होता तो शिकायत भी कर लेते,
कोई था नही तो ग़मो को सीने से लगा लिया।।
रौनकें लग जाती थी वहाँ जहाँ होता था मैं,
कुछ वजह थी जो खुद को श्मशान बना लिया।।
एक अँधेरी रात के सिवा अब बाकी भी क्या था,
तन्हाई ही तन्हाई थी चाँद तारों को दोस्त बना लिया।।
कभी किसी को आज़मा कर नही देखा,
मुझे देखो सारे ज़माने ने आज़मा लिया।।
बात इबादत की ही तो थी मुहोब्बत में ,
मैंने तो पत्थरों पर भी सिर झुका लिया।।
ज़िंदगी के इस जुए के खेल में जब सब हार गया,
आखिर में दाव मैंने खुद को ही लगा दिया।।
कोई समझना चाहता तो समझता भी आखिर,
क्यों किसी एक के लिए राकिब जमाना बना लिया।।
तेरी बंदानवाज़ी से भी खुश हूँ मौला,
तेरा दिया मैंने हँसकर माथे से लगा लिया।।
कुछ हालातों ने कुछ जज़्बातों ने जँझोड़ दिया,
यही वजह है "चौहान" ने कलम को सीने से लगा लिया।।
बड़ी नुमाइशें लगती है यहाँ मुहोब्बत में जज़्बातों की,
देखा ना गया तो खुद को जिंदा दफना लिया।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Best lines 😍😍😍😍😍 Bhai ... Mazaa AA gya 😍😍😍😘😘😘😘😘
ReplyDeleteThanks bro 😘😘
DeleteAmazing lines
ReplyDeleteThanks 😊😊
DeleteGajab hai subham bhai
ReplyDeleteThanks bro 🤗🤗
DeleteSunny Deaol ki vjh se apki post mujhe mil jaati h
ReplyDeleteOk send me request on Facebook
DeleteAmazing lines bro👌👌
ReplyDeleteThanks alot bro 🤗🤗
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