Wednesday, 6 November 2019

"एक क़िस्सा" (EK KISSA)


तेरी कहानी में मेरे नाम एक किस्सा आया,
खुशी थी के तेरे ग़मो में मेरा हिस्सा आया।।

तू नही जानता तू क्या था मेरे लिए,
यही बता दे मुझे खो के तूने क्या पाया।।

तेरे हर एक सवालो के जवाब थे मेरे पास मगर,
कोई अपना होता तो समझ जाता मैं क्यों ना दे पाया।।

बड़ा खुदा बना कर पूजता रहा मैं तुझे,
आँख खुली तो आज सामने पत्थर नज़र आया।।

सब दरख़्त काट पर फेंक दिए उसने,
आज धूप लगी तो पेड़ो की तलाश में नज़र आया।।

मैं क्यों कहुँ के अपने फैसले पर एक नज़र सोच ज़रा,
मैं गलत था जो तेरे पास पलभर को लौट आया।।

ये तो हर सच्ची मुहोब्बत का अंजाम है "चौहान"यहाँ पर,
जो कल फ़साना आज हकीकत कल कागज़ों पर उतर आया।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ ।।

3 comments:

  1. तू नही जानता तू क्या था मेरे लिए,
    यही बता दे मुझे खो के तूने क्या पाया। Best lines brother keep it up 😘😘😘😘

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