जानता हूँ तू चुप है ख़ामोश है,
कुछ खास नही कहती,
हाँ सच ये भी नही की,
मैं हर वक़्त सच लिखता हूँ,
पर तु मेरे अच्छे बुरे हर वक़्त में शामिल है,
किसे खबर है मैं क्यों और क्या लिखता हूँ,
कभी तुझे आसमाँ की परी बताता हूँ,
कभी खुदा तो कभी पत्थर,
पर एक बात है जो तू गौर नही करती,
के हर लफ्ज़ में मैं तुझे अपना लिखता हूँ,
तेरी मुहोब्बत का फ़क़ीर हूँ,
लकीरों का मोहताज़ नही,
हाँ, सच है अपनी तहरीर से ,
खुद अपनी तकदीर लिखता हूँ,
लगाम लफ़्ज़ों पर कैसे लगाऊँ,
जज़्बात है मेरे दिल के ,
माना चुभती है तुझे बाते मेरी,
पर ज़रा सोच क्यों अपने दिल को दुखा,
मैं ये ख़्यालात लिखता हूँ,
तू मुहोब्बत है मेरी,
गिला, शिकवा, शिकायत, मुहोब्बत, चाहत,
सब तुझसे ही होंगी,
कैसे कहुँ तेरे बिन ये कहानी अभी बाकी है,
माना लिखता है "चौहान" हाल-ए-दिल,
सच है पर अच्छा है थोड़ी नादानी अभी बाकी है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No Wards for this 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThanku so much dear 😍😍😍😍😍😍😍😍😍
Delete❤️❤️❤️❤️❤️
ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍😍
ReplyDeleteOoooooossssssssssm bro
ReplyDeleteThanks 😍😍😍
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