बड़ी गहराइयों से जानता हूँ तुझे,
तू यूँ छोड़ जाने वाला तो नही था।।
बड़े गलत फैसले थे जिसके भी थे,
यकिनन ये फैसला तेरा तो नही था।।
किन मजबूरियों में घिरा जो दूर हुआ,
इतना हौसला यार तुझमे तो नही था।।
तेरे मेरे दरमियाँ कहाँ कोई दीवार थी,
सब तो मालूम था हमे छुपा कुछ नही था।।
बिन बताए चला गया तू बेगानों की तरहा,
देख इतना बड़ा रुतबा तो तेरा नही था।।
ना जाने कैसे राह में थक कर बैठ गया तु,
मंज़िल से पहले तो तू रुकने वाला नही था।।
बस एक यही रास्ता रह गया तुझसे बात करने का,
वरना "चौहान" कभी तुझे लिखने वाला तो नही था।।
कोई जड़े ही काट कर ले गया मेरी वरना,
सबको पता था ये दरख़्त गिरने वाला तो नही था।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Fantastic lines...so touched...i also want to take a decision but it is too hard....
ReplyDeleteRhnde tu nuye theek h 🤣🤣
DeleteNice
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