Monday, 4 November 2019

"लिखना छोड़ दे" (LIKHNA CHORD DE)


तू "चौहान" अब लिखना छोड़ दे,
ख्वाइशों को ,अरमानो को,
जज़बातों को , हालतों को,
लफ़्ज़ों की डोर में पिरोना छोड़ दे,
बहुत लिखे है फ़साने दिल के,
अब दिल की बातों को बताना छोड़ दे,
क्या फर्क पड़ता है तेरे दमन में दाग है या नही,
जमाने का दामन अपना दिखाना छोड़ दे,
कही सुनी बातों पर यूँ गौर ना किया कर,
लोगों की बातों में अब तू आना छोड़ दे,
तू किन से आस लगाए बैठा है मरहम की,
ज़ख़्मो पर नमक लगते है यहाँ लोग ,
दूसरों को हाल अपना बताना छोड़ दे,
महज़ एक ज़रूरत ही तो बनकर रह गया है,
अब मतलबी लोगों के काम आना छोड़ दे,
वो कहाँ तेरा अपना था जो छोड़ कर चला गया,
तू भी बेगानों से अपना पेश आना छोड़ दे,
मरने के बाद "चौहान" कहाँ कोई अपना है,
तू भी तेरे ख़्वाबों की कब्र पर आना जाना छोड़ दे।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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