थी मुहोब्बत की कहानी इतनी "चौहान",
कोई हमें ना मिला हम किसी के हो गए।।
रात बहुत थी तन्हा मुसाफ़िर थे हम,
चाँद ना मिला हम जुगनुओं के हो गए।।
बड़ी ख़्वाईश थी उस गुलिस्तां में समाने की,
फूल तो ना मिले हम खुशबुओं के हो गए।।
बड़े बेसबर थे कोई हमारे हम किसी के लिए,
कोई चौंखट पर आया मेरे हम उसी के हो गए।।
बड़ी चाहत थी मंज़िलों को पाने की हमें,
साथ चले नही वो हम किसी की मंज़िल हो गए।।
अब क्या लिखुँ इस कहानी का अंज़ाम "चौहान",
किसी की कहानी पुरी करके हम अधूरे हो गए।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Wah
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteNice 👌👌👌👌
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