एक पल को ठहर जा,
अभी कुछ बात बाकी है।।
नज़र भर देख तो लूँ तुझे,
अभी ये मुलाकात बाकी है।।
ये रात गुज़र जाने दे ज़रा,
अभी मेरे कुछ ख़्वाब बाकी है।।
ज़िंदगी वही है जो तेरे संग है,
अभी जीने कुछ लम्हात बाकी है।।
पत्ते टूटे है तो कल नए भी आएंगे,
अभी दरख्तों पर शाख बाकी है।।
अभी दरिया ही तो बना हूँ कतरे कतरे से,
सागर में मिलने की अभी मेरी प्यास बाकी है।।
किसी बहाने से तू नज़र आता रहे,
बस ऐसे पलों की आस बाकी है।।
रोती रही मेरी कलम रात भर "चौहान" ,
अभी लिखना कुछ हिसाब बाकी है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice 👌👌
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteThanks 😍😍
ReplyDelete