वो बात उनकी करते रहे "चौहान" जिनके नाम हो गए,
मैं अक्सर उनको पढ़ता रहा जो "शायर बदनाम" हो गए।।
बात मुहोब्बत में "शिव" की करूँ ,"फ़ैज़" की या "मज़ाज" की,
किस्से मुहोब्बत के तो सारे "ग़ालिब" के ही नाम हो गए।।
बात "तुलसीदास" की करूँ, जिसको घर से निकला था,
मस्ज़िद में सोकर लिखी, "रामचरितमानस" को लोगो के प्रणाम हो गए।।
बात कबीर कि कहूँ, जिसने लिखा नही,जिया है अपने लेख को,
आज "दोहे कबीर के" आम लोगों के जीवन का सार हो गए।।
वो जीता रहा मुहोब्बत को कविताओं में, हालातों से लड़ झगड़कर,
आज गीत "शिव" के लोगो के मुहोब्बत के कलाम हो गए।।
वो जिसने जग की परवाह ना कर ज़ुबाँ पर कृष्ण-राग चढ़ाया,
वो "मीरा" की लग्न के चर्चे तो लोगो में शरेआम हो गए।।
बात अगर करूँ "जौन" की तो मुहोब्बत के अलग मुक़ाम नज़र आये,
वो मंच पर बेबाकी , बेपरवाही के किस्से सब तमाम हो गए।।
बात "फ़ैज़" की करूँ आज भी वो उर्दू शायरी का मुकाम नज़र आता है,
"और भी गम है जमाने मे मुहोब्बत के सिवा" ये असार आज कहावतों के नाम हो गए।।
आज भी कायल हूँ तेरी शेरो-शायरी के मिज़ाज़ का "मज़ाज",
जीते जी वो मुकाम ना मिले ,आज लेख तेरे लोगो की ज़ुबान हो गए।।
आज भी सोचता हूँ "चौहान" जो बेबाकी से हक़ीक़त बना जीते थे लिखावट अपनी,
क्यों फिर वो शायर जमाने की नज़रों में "शायर-बदनाम" हो गए।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Wah..... ��������
ReplyDeleteThanks 😍😍😍
DeleteWha nice lines
ReplyDeleteThanku so much bro
DeleteNYC one 🌹❤️
ReplyDeleteThanks bhai 😍😍
DeleteNYC one 🌹❤️
ReplyDeleteThanks 😍😍
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