Saturday, 25 May 2019

"कुछ तो" (KUCH TO)


कुछ तो रिश्ता रहा होगा हमारा तुम्हारा,
यूँ बेमतलब बेवज़ह तो मुलाक़ात नही होती।।

तपिश नज़र आई होगी ज़मी की आसमाँ को,
वरना कभी यूँ बेमौसम बरसात नहीं होती।।

ये अंधेरा है ये रात है जो वज़ूद बरकरार रखती है,
वरना चाँद तारों की कोई बिसात नही होती।।

ये करामात है उस खुदा की ,के पत्थरो का भी मुकाम है,
पैरो की ठोकरें रहते, मंदिरों में पूजने की औकात न होती।।

ये दिल है जो समझ लेते है जज़्बात एक दूजे के बिन बोले,
वरना कभी बिना लफ़्ज़ों के खमोशी से बात नही होती।।

ये तेरा कर्म है "चौहान" के तेरे बाद भी लोग चाहते है तुझे,
अमर रूह होती है कभी आदम की जात नही होती।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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