दूर कहीं अंधेरे में एक साया गुमनाम है,
सागर सुख गया पर अश्क़ों के निशान है।।
कहने को साथ चलता मेरे सारा जहाँ है,
तेरे इश्क़-ए-गम का दिल अकेला मेहमान है।।
माना राते काली है आज भी तन्हा उदास है,
चहरे पर तेरी यादों की हल्की सी मुस्कान है।।
ये दस्तूर है के इश्क़,वफ़ा सब धोखे है,
फिर भी इश्क़-ए-सागर में डूबा हर इंसान है।।
क्या फायदा "चौहान" करके काले पन्ने,
जब तेरे दर्द से वाकिफ़ होकर भी वो बेज़ुबान है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Superb bhai
ReplyDeleteमाना राते काली है आज भी तन्हा उदास है,
चहरे पर तेरी यादों की हल्की सी मुस्कान है।। this lines so awesome
Thanks 😍😍
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