Monday, 20 May 2019

"मैं और तू" (MAIN AUR TU)


खुद को समझता हूँ बार-बार,
के तू अब मेरे पास नही,
जहाँ जाकर तू रहने लगा है,
लौट आने की कोई आस नही।।

ऐसा नही के थक गया रास्तों पर,
सच कहूं तो अब मंज़िल की तलाश नही।।

कहने को तो दोस्त बहुत है ,
पर जिसे जगह तेरी दे दूं,
इतना भी कोई खास नही।।

बहुत ख़लिश है जिंदगी में मेरी,
क्या खोया है मैंने,
इस बात का किसी को एहसास नही।।

अब तो तू बस किस्से-कहानियों में आबाद रहेगा,
दो दिन आँसू बहाएंगे लोग फिर किसको तू याद रहेगा,
हकीकत है मिट्टी का जिस्म एक रोज़ मिट्टी हो जाना है,
संभालकर रखता कोई यहाँ मशान की राख नही।।

सब कहते है कि भुला दूँ तुझे अब ,
तेरे पास वो जिस्मानी लिबास नही,
ये दुनिया सिर्फ ज़रूरत देखती है "चौहान",
यहां रूहानी नातों की कोई औक़ात नही ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


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