नीँद नही आती है,
बेचैनी सताती है माँ,
कैसे कहुँ हर रोज़,
तेरी याद रूलाती है,
आँचल में रख सिर मेरा,
हाथों से सहला दे माँ,
मैं तो तुझसे कह ना पाऊँ,
लौरी गा के सुला दे माँ,
थक गया हूँ घूम घूम कर,
दुनिया के कमकारों से,
सुखी रोटी का निवाला,
तेरे हाथों से खिला दे माँ,
लेजा फिर उसी बचपन मे माँ,
फिर गोद मे अपनी सुला दे माँ,
अब और ना सता मुझको माँ,
आ सीने से लगा ले माँ,
आ सीने से लगा ले माँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
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