Thursday, 16 May 2019

"फ़क़ीर का हाल" (FAQIR KA HAAL)


कभी किसी फ़क़ीर का हाल लिखूँगा,
जो करता हूँ खुद से वो सवाल लिखूँगा।।

किस विरहा का रोग लगा बैठा हूँ दिल को,
क्या है मुझको मुझसे वो मलाल लिखूँगा।।

कैसे बदलती है क़िस्मत हाथो में आते ही उस काँसे के बर्तन की,
सब उस फ़क़ीर की फ़कीरी का क़माल लिखूँगा।।

पास कुछ नही है पर खाली किसी को जाने नही देता है,
रंक से जो राजा बना दे ऐसी दुवाओं का कमाल लिखूँगा।।

वो जो ना मोह माया का भूखा है ना वैभव- सम्मान का,
हाँ कभी किसी वैरागी के वैराग्य का कमाल लिखूँगा।।

वो जो किसी महल अटारी में सोने चांदी से नही मिल पाता,
दरवेश की चौंखट पे जो मिलता है सुकून उस चौंखट का कमाल लिखूँगा।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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