हाथ उसके भी जले होंगे जिसने आशियाँ मेरा जलाया होगा,
मेरा तो माना सब कुछ खो गया,उसने भी तो कुछ न कुछ गवाया होगा।।
मैं इस राख में , इस ख़ाक में ,ढूंढता रहा रात भर उस शक्श को,
जिसने मेरा अक्ष बचाने के ख़ातिर खुद को खाक में मिलाया होगा।।
मैं दीये की तरह खुद को जला उम्र भर उसको रौशन करता रहा,
साज़िश उसकी थी खिड़की खुली रखना, हवाओं को पता मेरा उसने ही बताया होगा।।
एक जगह थी जो बस हम जानते थे , हम मिलते थे जहाँ अक्सर,
मुझसे दूर हो कर ,मेरी तलाश में अकेला वो वहां ज़रूर आया होगा।।
उसे आज मैं बेवफ़ाई का इल्जाम दूँ भी तो कैसे " चौहान",
मुझमे वो प्यार नज़र ना आया होगा तभी किसी और से दिल लगाया होगा।।
सिर्फ बातों का खेल ही तो बनकर रह गई है मुहोब्बत यहाँ,
कौन सा वो इश्क़ में हक़ीक़त में चाँद तारे ज़मी पर लाया होगा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Wah..... 👏👏👏👏
ReplyDeleteThank 😍😍😍
DeleteBahoot khoob
ReplyDeleteसिर्फ बातों का खेल ही तो बनकर रह गई है मुहोब्बत यहाँ,
कौन सा वो इश्क़ में हक़ीक़त में चाँद तारे ज़मी पर लाया होगा।।
Thanks 😍😍
DeleteThanks 😍😍😍
ReplyDeleteNice bro 👌👌 acha likha hai
ReplyDeleteThanks alot bro
DeleteAwesome....👌👌👌👌
ReplyDeleteThanks 😊😊
DeleteBhai, 👌👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThanks bro 😍😍
DeleteGjb
ReplyDeleteThanks bro
DeleteExcellent Sir😀
ReplyDeleteThanku so much bro 😍😍😍
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