जो तेरी रूह को छू जाए ऐसी बात कहाँ से लिखूँ,
जो तुझे अपने से लगे ऐसे जज़्बात कहाँ से लिखूँ।।
मौसम पतझड़ के देखे है हर मौसम में मैंने,
वो सावन की पहली बरसात कहाँ से लिखूँ।।
जब भी मिला वो हिज़ाब में मिला है मुझे,
फिर उसके नूर-ए-हुस्न की बात कहाँ से लिखूँ।।
हमेशा तन्हाइयों में गुज़री है रात उसकी याद लेकर,
इस अमावसी रात में चाँद तारों की बात कहाँ से लिखूँ।।
इस सफर में कोई हमसफ़र ही नही है मेरा,
कैसा होता है किसी का साथ, ये बात कहाँ से लिखूँ।।
एक अरसा बीत गया तेरा दीदार किए बिना,
कैसी होती है वो चाँद तारों भरी, पूनम की रात कहाँ से लिखूँ।।
जैसा कहानियों में पढ़ा वैसा हक़ीक़त में कुछ नही था,
फिर तू बता मैं इश्क़ मुहोब्बत की बात कहाँ से लिखूँ।।
कभी लिखा तो ज़िक्र ज़रूर आएगा तेरा कहानी में मेरी,
अभी उलझे- उलझे से है हालात, जज़्बात कहाँ से लिखूँ।।
जब मिलना था तब मज़बूरी बताता था वक़्त और हालतों को "चौहान",
जब कभी हम मिल ही ना पाए तो मुलाक़ात कहाँ से लिखूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

So nice brother ❤️
ReplyDeleteThanks brother 🤩🤩🤩🤩
DeleteExcellent my dear
ReplyDeleteThanks alot dear 😊
Delete👌
ReplyDeleteThanks ...tune id ni dali apni abhi tak 🙄
ReplyDeleteNice bro👌👌
ReplyDeleteThanks bro 🤩🤩
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